Hindi Swar Vyanjan — स्वर और व्यंजन | Vowels Consonants

Hindi Swar Vyanjan: भाषा परस्पर विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है। अर्थपूर्ण ध्वनियाँ साधनों का एक समूह है जिसके द्वारा हम अपने विचार दूसरों तक पहुँचा सकते हैं और दूसरों के विचारों से अवगत हो सकते हैं। भाषा के दो रूप होते हैं, पहला मौखिक और दूसरा लिखित होता हैं

  • लिपि: भाषा को जिस प्रकार लिखा जाता है उसे लिपि कहते हैं। हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है।
  • व्याकरण: भाषा को शुद्ध रूप में बोलना, लिखना और पढ़ना, सीखने की विधि व्याकरण कहलाती है।

भाषा के मुख्य तीन भागों के आधार पर व्याकरण को तीन भागों में बांटा गया है।

  • वर्ण विचार
  • शब्द विचार
  • वाक्य विचार

वर्गों के समूह या समुदाय को वर्णमाला कहते हैं। Hindi Swar Vyanjan हिंदी में वर्ण वर्गों की कुल संख्या 45 होती है। जो की, अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं एवं अः और इसके साथ ही ,क ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह शामिल हैं

संस्कृत वर्णमाला में एक और स्वर होता “” है। इसको मिलाकर वर्गों की कुल संख्या 46 हो जाती है। इसके अलावा हिंदी में अ, ड, ढ़ और अंग्रेजी से आने वाली ध्वनि प्रचलित है।

हम आपको बता दें की, अँ, अं से अलग होती है, और ठीक इसी तरह ड़, ड से अलग, एवं ढ़, ढ से अलग होता है। इसी प्रकार ऑ, आ से अलग ध्वनि है। असल में इन ध्वनियों (अँ, ड, ढ, आँ) को भी हिन्दी वर्णमाला में सम्मिलित किया जाना चाहिए। अगर इनको भी सम्मिलित कर ले फिर हिन्दी में वर्गों (Hindi Swar Vyanjan) की कुल संख्या 52 की हो जाती है।

स्वर वर्ण11
व्यंजन वर्ण25
अंतस्थ व्यंजन4 (य, र, ल, ब)
उष्म व्यंजन4 (ह, श, ष, स)
संयुक्त व्यंजन4 (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र )

वर्ण विचार व्याकरण का वह भाग है जिसमें अक्षरों के आकार, भेद, उच्चारण और उनके संयोजन से शब्द बनाने के नियमों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। किसी अक्षर पर विचार करने से पहले ध्वनि और रंग के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। वर्ण को ध्वनि चिन्ह भी कहा जाता है लेकिन इनमें अंतर है।

Different Between Swar and Vyanjan In Hindi

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(Hindi Swar Vyanjan) हिन्दी वर्णमाला के मुख्यतः दो भाग होते हैं, पहला स्वर और दूसरा व्यंजन होता हैं। जहां वर्ण का प्रयोग लिखने, पढ़ने और देखने के लिए किया जाता है, वही ध्वनि / स्वर को बोलने और सुनने के लिए किया जाता है।

उदाहरण के लिए जब मुख से अ, आ, इ, ई और क, ख, ग, घ इत्यादि का उच्चारण किया जाता है, तो ये ध्वनियाँ कहलाती हैं। वहीं इनके लिखित रूप को ‘वर्ण’ कहते हैं। किन्हीं दो या दो से अधिक भाषाओं के बीच वर्णानुक्रम में अंतर हो सकता है, लेकिन कोई ध्वनिगत् कोई अंतर नहीं है।

उदाहरण के लिए, अंग्रेजी का कंप्यूटर और हिंदी कंप्यूटर में कोई ध्वनिगत् अंतर नहीं है, क्योंकि दोनों एक ही प्रकार की ध्वनियाँ हैं। लेकिन लिखित रूप में, दोनों भाषाओं के चिह्न पूरी तरह से अलग हैं, इसलिए वर्णानुक्रम में अंतर है।

Swar In Hindi Vowel — स्वर किसे कहते हैं?

वे ध्वनियाँ जिनमें मुख से वायु एक सहज गति से निकलती है, स्वर कहलाती है। उन्हें बोलने के लिए किसी अन्य ध्वनि के साथ सहयोग करने की आवश्यकता नहीं है। अर्थात स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले अक्षर को स्वर कहते हैं। हिंदी वर्णमाला के टोटल 11 स्वर वर्ण होते हैं, जो की निम्न हैं।

AAAIEEUOORIEAEOAO

उच्चारण के आधार पर स्वर के तीन भेद होते हैं, जिनमे पहला लघु/ह्रस्व स्वर, दूसरा दीर्घ स्वर, तीसरा प्लुत स्वर होता हैं।

ह्रस्व स्वर (Hasv Swar)

जिन स्वरों को बोलने में कम समय लगता है, अर्थात एक मात्रा का समय, वे ह्रस्व स्वर कहलाते हैं। अर्थात जिन स्वरों के उच्चारण में कम से कम समय लगता है, उन्हें हर्ष स्वर कहते हैं। उन्हें ‘मूल स्वर‘ भी कहते है। Hasv Swar के उदहारण कुछ निम्न हैं: अ, इ, उ, ऋ, इत्यादि।

दीर्घ स्वर (Dirgh Swar)

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से दुगना समय लगता है, दीर्घ स्वर कहलाते हैं। दीर्घ स्वर दो शब्दों के योग से बनते हैं और हिन्दी भाषा में यह सात होते हैं। Dirgh Swar के उदहारण कुछ निम्न हैं: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

प्लुत स्वर (Plut Swar)

जिस स्वर के उच्चारण में दीर्घ स्वर अर्थात तीन खंडों से अधिक समय लगता है, उसे प्लुत स्वर कहते हैं। अर्थात जिस स्वर के उच्चारण से तीन गुना अधिक समय लगता है, उसे ‘प्लुत स्वर‘ कहते हैं। Plut Swar के उदहारण कुछ निम्न हैं: हेलोऽऽ, शाऽऽम, इत्यादि।

इसमें चिन्ह (ऽ) होता है और अक्सर किसी को बुलाने अथवा पुकारने करते समय इसका उपयोग किया जाता हैं।

Swar Kise Kahate Hain | Hindi Swar Letters

  • कण्ठ — अ, आ, क वर्ग वर्ण (क्, ख्, ग्, घ्, ड़्), ह तथा विसर्ग (:)।
  • तालू — इ, ई, च वर्ग के वर्ण (च्, छ्, ज्, झ्, ञ्)।
  • मूर्धा — ऋ, ऋृ, ट वर्ग के वर्ण (ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्) र् ,ष्।
  • दन्त — लृ, त वर्ग के वर्ण (त्, थ्, द्, ध्, न्) ल्, स्।
  • ओष्ठय — उ, ऊ, प वर्ग के वर्ण (प्, फ्, ब्, भ्, म्)।
  • नासिका — ञ्, ण्, न्, म।
  • कण्ठतालु — ए, ऐ।
  • कण्ठोष्ठ — ओ, औ।
  • दन्तोष्ठ — व।

Vyanjan in Hindi Consonants — व्यंजन किसे कहते हैं?

व्यंजन वे वर्ण हैं जिनकी उच्चारण करते समय मुख से वायु निकलती है और व्यंजन बोलते समय स्वर की सहायता लेनी पड़ती है। प्रत्येक व्यंजन के उच्चारण में एक स्वर होता है। स्वरों के बिना व्यंजन का उच्चारण नहीं किया जा सकता।

व्यंजन के कुछ उदाहरण कुछ इस प्रकार के हैं: ख् + अ = ख, प् + अ = प, इत्यादि। वर्णमाला में 33 व्यंजन होते हैं।

क वर्ग व्यंजन
च वर्ग व्यंजन
ट वर्ग व्यंजन
त वर्ग व्यंजन
प वर्ग व्यंजन
य वर्ग व्यंजन
श वर्ग व्यंजन

व्यंजनों का वर्गीकरण यानि व्यंजन के कुल 3 भेद होते हैं, जिनमें पहला स्पर्श व्यंजन (Sparsh Vyanjan), दूसरा अंतस्थ व्यंजन (Antastha Vyanjan) और तीसरा संघर्षी / ऊष्म व्यंजन (Sangharshi / Ushma Vyanjan) होता हैं।

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स्पर्श व्यंजन क्या होता हैं? | Sparsh Vyanjan

व्यंजन का उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी भी भाग जैसे लौकी, तालु, मूर्ति, दाँत या होठ को स्पर्श करती है, वे स्पर्श व्यंजन कहलाते हैं। स्पर्श व्यंजन की कुल संख्या 25 है। उन्हें पाँच वर्गों में रखा गया है, और प्रत्येक वर्ग में पाँच व्यंजन हैं।

स्पर्श व्यंजन के प्रकार

क वर्ग (कण्ठ का स्पर्श)क, ख, ग, घ, ङ।
च वर्ग (तालु का स्पर्श)च, छ, ज, झ, ञ।
ट वर्ग (मूर्धा का स्पर्श)ट, ठ, ड, ढ, ण।
त वर्ग (दाँतो का स्पर्श)त, थ, द, ध, न।
प वर्ग (होठों का स्पर्श)प, फ, ब, भ, म।

अंतस्थ व्यंजन क्या होता हैं? | Antastha Vyanjan

अंतस्थ का अर्थ है मध्य व्यंजन। जिन वर्णों का उच्चारण पारंपरिक वर्णमाला (स्वर और व्यंजन) के बीच स्थित होता है, उन्हें अंतस्थ व्यंजन कहा जाता है। अंतस्थ व्यंजन के उदाहरण निम्न हैं: य, र, ल, व (य वर्ग)।

संघर्षी / ऊष्म व्यंजन क्या होता हैं? | Sangharshi / Ushma Vyanjan

इसे वर्ण को गरम भी कहते है, ऊष्म यानी गरम। जिन वर्णो के उच्चारण के समय हवा मुख के अलग अलग भागों से टकराता हैं, और गर्मी अथवा उष्म पैदा करें, उन वर्णों को ऊष्म व्यंजन / संघर्षी व्यंजन कहा जाता हैं। ऊष्म व्यंजन के उदाहरण निम्न हैं: श, ष, स, ह (श वर्ग)।

इसके अलावे भी व्यंजन के अन्य भी कुछ और भेद भी होते हैं, जैसे की संयुक्त व्यंजन, इत्यादि।

संयुक्त व्यंजन क्या होता हैं? | Sanyukt Vyanjan

किसी शब्दांश में स्वर के पहले या बाद में एक से अधिक, एक साथ उच्चारित व्यंजन संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं। अर्थात् दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल को संयुक्त व्यंजन कहते हैं। इनके उच्चारण के समय शब्दांश सममित नहीं होता और स्वर समर्थन अनिवार्य नहीं होता। क्ष, त्र, ज्ञ, श्र ये संयुक्त व्यंजन हैं जो दो व्यंजनों को मिलाकर बनते हैं।

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संयुक्त व्यंजन के प्रकार

  • क्+ष+अ = क्ष = अक्षत, अक्षय, क्षत्रिय इत्यादि।
  • त्+र्+अ = त्र = त्राण, त्रिशूल, त्रिवेद इत्यादि।
  • ज्+ञ+अ = ज्ञ = ज्ञानी, विज्ञापन, यज्ञ इत्यादि।
  • श्+र्+अ = श्र = श्रीमती, श्रुति, श्रेष्ठ इत्यादि।

FAQ: Hindi Swar Vyanjan

प्रश्न — हिंदी में कितने वर्ण होते हैं?

उत्तर — Hindi Swar Vyanjan हिन्दी भाषा में कुल 52 वर्ण शामिल हैं।

प्रश्न — हिंदी वर्ण के भेद कितने हैं?

उत्तर — हिन्दी भाषा में वर्णों के दो भेद हैं। स्वर और व्यंजन (Hindi Swar Vyanjan) or Swar and Vyanjan In Hindi

प्रश्न — स्वर किसे कहते हैं?

उत्तर — अगर आप, ये जानने के लिए इक्छुक हैं की, स्वर किसे कहते हैं? तो जिसका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्णों की सहायता के किया जाता है, उन्हें स्वर कहा जाता हैं।

प्रश्न — हिन्दी भाषा में कितने व्यंजन होते हैं?

उत्तर — हिंदी वर्णमाला में कुल 33 व्यंजन होते हैं।

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